लग्नानंतर स्वतःच्या वजनाएवढी पुस्तके सासरला घेऊन जाणारी नवरी
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( कुमारी किन्नरी बा जडेजा ही उच्चशिक्षित महावेडी तरुणी आपल्या लग्नानंतर २२०० पुस्तके घेऊन सासरी गेली)
({ दहेज वा हुंडा दिला नाही तर सूनेला छळणे, त्रास देणे, मारझोड करणे वा जाळणे अशी अघोरी कृत्ये घडत असताना ही घटना संस्मरणीय आहे})
{ वाचनाची आवड लहानपणापासूनच असल्याने स्वतः चे घरी तिचे ५०० पुस्तकांचे ग्रंथालय आहे. २०० पुस्तके लग्नात पाहुण्यांना भेट दिली}
[ वडील हरदेवसिंह जडेजा यांनी मुलगी किन्नरीला लग्नात दागिने, कार, स्कूटर वा अन्य काय देऊ असे विचारता किन्नरीने मला माझ्या वजना एवढी पुस्तके द्या असे सांगितले]
(( १३ फेब्रुवारी, २०२२ ला कु. किन्नरी व पूर्वजीतसिंह यांचे लग्न झाले. कु. किन्नरीने पती पूर्वजीत यांना २२०० पुस्तके भेट दिली.))
{{ सगाई (साखरपुडा) झाल्यावर वडील हरदेवसिंह यांनी गुजराती, हिंदी व इंग्रजी भाषेतील पुस्तके काशी, दिली व बेंगलोर येथून मागवली होती. मुस्लीम, ख्रिश्चन, जैन, पारसी धर्मातील ग्रंथ आहेत. रामायण, महाभारत, वेद-पुराण पुस्तके सुद्धा आहेत. जगातील व भारतातील महनीय व्यक्तींची चरित्रे आहेत. शास्त्रीय व संशोधनपर पुस्तके आहेत.}}
[[ गुजरात राज्यात राजकोट मधील नानमवा येथील हरदेवसिंह जडेजा यांची मुलगी कु. किन्नरी व चि. पूर्वजीतसिंह यांचे लग्न आहे. पूर्वजीतसिंह हा बडोदरा येथे इंजिनिअर आहे. पूर्वजीतसिंह यांच्या घरीही पुस्तके भेटीचे खूप कौतुक होऊन सून किन्नरी हिचा खूप अभिमान वाटला
आधुनिक लग्न कसे होऊ शकते याचा आदर्श कु. किन्नरी व चि. पूर्वजीतसिंह यांनी घालून दिला आहे. कु. किन्नरी व चि. पूर्वजीत सिंह यांना भावी आयुष्यासाठी खूप खूप शुभेच्छा व भरभरुन शुभाशीर्वाद. दोघांना सुखी, समाधानी, सजग व समृद्ध आयुष्यासाठी परमेश्वराचे चरणी मनोमन प्रार्थना
संपत गायकवाड (माजी सहाय्यक शिक्षण संचालक
यह राजकोट की किन्नरी बा जाडेजा है। इनका बहुत सुन्दर भाषण इस भाषण के एक एक शब्द मे सीख है किन्नरी बा जीजा हुकुम अपकी बाते कानो से सीधा दिल मे उतरती है अपके शब्दो मे आप के माता पिता के संस्कार दिखते है। अपके माता पिता के चरणो मेरा प्रणाम आप के ज्ञान को मेरा नमन है । इनके बारे मे अपको एक दिल को छू लेने वाली जानकारी देता हूँ। बेटी ससुराल जाते समय पिता और परिवार से गहने, कपड़े,जवाहरात, वाहन, नकद राशि आदि लेती है लेकिन किन्नरी बा जाडेजा ने पिता से अपने वजन जितनी किताबों की मांग की पिता ने उसकी इस मांग से प्रेरित होकर उसे यह वचन दिया कि वह एक गाड़ी भरकर किताबें देकर ही उसे विदा करेंगे
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शिक्षक हरदेव सिंह जाडेजा की बेटी किन्नरी बा को बचपन से ही किताबें पढ़ने का शौक रहा है. वही उसके घर पर ही 500 किताबों की लायब्रेरी हैं. उसके किताबों के शौक के चलते बेटी किन्नरी को अच्छे संस्कार मिल गए. उसकी शब्द संपदा भी काफी बढ़ गई. जिससे वह एक कुशल वक्ता भी बन गई. अपने विचारों को वह धारदार तरीके से रखना जानती है. जब उसकी सगाई वडोदरा के भगीरथ सिंह सरवैया के बेटे कनाडावासी इंजीनियर पूर्वजीत सिंह से हुई, तो किन्नरी ने अपने पिता से कहा-मेरी शादी में आप दहेज के रूप में मेरे वजन जितनी किताबें देंगे, तो मुझे बहुत ख़ुशी मिलेगी.
यह बात सुन कर उसके पिता ने बेटी को वचन दिया कि वे उसे एक गाड़ी भरकर 2200 किताबें दहेज के रूप में देंगे, बेटी की इस इच्छा को पूर्ण करने के लिए पिता ने पहले पुस्तकों की एक सूची बनाई, फिर 6 महीने तक दिल्ली, काशी और बेगलुरू सहित कई शहरों से किताबें इक्कठा की. शिक्षक पिता ने कहा कि बेटी को दी जाने वाली किताबों में महर्षि वेद व्यास से लेकर आधुनिक लेखकों की अंग्रेजी, हिंदी और गुजराती भाषा की किताबें खरीदी अपनी बेटी को ये सारी किताबें एक गाड़ी में भरकर दी। अपकी सोच को सलाम है बाईसा हुकुम ।।
यह राजकोट की किन्नरी बा जाडेजा है। इनका बहुत सुन्दर भाषण इस भाषण के एक एक शब्द मे सीख है किन्नरी बा जीजा हुकुम अपकी बाते कानो से सीधा दिल मे उतरती है अपके शब्दो मे आप के माता पिता के संस्कार दिखते है। अपके माता पिता के चरणो मेरा प्रणाम आप के ज्ञान को मेरा नमन है ।
इनके बारे मे अपको एक दिल को छू लेने वाली जानकारी देता हूँ।
बेटी ससुराल जाते समय पिता और परिवार से गहने, कपड़े,जवाहरात, वाहन, नकद राशि आदि लेती है लेकिन किन्नरी बा जाडेजा ने पिता से अपने वजन जितनी किताबों की मांग की पिता ने उसकी इस मांग से प्रेरित होकर उसे यह वचन दिया कि वह एक गाड़ी भरकर किताबें देकर ही उसे विदा करेंगे.
शिक्षक हरदेव सिंह जाडेजा की बेटी किन्नरी बा को बचपन से ही किताबें पढ़ने का शौक रहा है. वही उसके घर पर ही 500 किताबों की लायब्रेरी हैं. उसके किताबों के शौक के चलते बेटी किन्नरी को अच्छे संस्कार मिल गए. उसकी शब्द संपदा भी काफी बढ़ गई. जिससे वह एक कुशल वक्ता भी बन गई.
अपने विचारों को वह धारदार तरीके से रखना जानती है. जब उसकी सगाई वडोदरा के भगीरथ सिंह सरवैया के बेटे कनाडावासी इंजीनियर पूर्वजीत सिंह से हुई, तो किन्नरी ने अपने पिता से कहा-मेरी शादी में आप दहेज के रूप में मेरे वजन जितनी किताबें देंगे, तो मुझे बहुत ख़ुशी मिलेगी. यह बात सुन कर उसके पिता ने बेटी को वचन दिया कि वे उसे एक गाड़ी भरकर 2200 किताबें दहेज के रूप में देंगे, बेटी की इस इच्छा को पूर्ण करने के लिए पिता ने पहले पुस्तकों की एक सूची बनाई, फिर 6 महीने तक दिल्ली, काशी और बेगलुरू सहित कई शहरों से किताबें इक्कठा की. शिक्षक पिता ने कहा कि बेटी को दी जाने वाली किताबों में महर्षि वेद व्यास से लेकर आधुनिक लेखकों की अंग्रेजी, हिंदी और गुजराती भाषा की किताबें खरीदी अपनी बेटी को ये सारी किताबें एक गाड़ी में भरकर दी।
अपकी सोच को सलाम है बाईसा हुकुम ।।
