✅ही पोस्ट ईतरांनाही पाठवा 👇 Share on WhatsApp Share on Facebook Share on Telegram श्री दुर्गायाः आरतिः || (मूल मराठी- दुर्गे दुर्घट भारी) दुर्गे सुदुर्गमोऽस्ति त्वदृते संसारः अनाथनाथे अम्बे अस्तु कृपाप्रसरः | वारय वारय जननम् मरणम् वारय मे अस्मि विपत्तिषु पतितो मातस्तारय मे || १|| || जय देवि जय देवि || जय देवि जय देवि महिषासुरमथिनि | सुरवर- ईश्वर- वरदे संजीवनि तारिणि || धृ. || त्रिभुवन- भुवने नाऽन्या भजते त्वत्साम्यम् वेदचतुष्कम् श्रान्तम् त्वाम् स्तोतुम् अशक्तम् | विवदत् प्रवाहपतितम् षट्शास्त्राधारम् किन्तु त्वम् भक्तेषु प्रसीदसि क्षिप्रम् || २|| || जय देवि जय देवि || प्रसन्न- वदने दासे प्रसीदसि त्वरितम् क्लेशान् मोचय मातश्छेदय भवपाशम् | अम्बे त्वदृते को माम् कुर्यात् पूर्णाशम् नरहरि- मन आस्ते तव पदपंकजलीनम् || ३|| || जय देवि जय देवि || || जय जय दुर्गे जगदम्बे || भक्तान् तारय हे अम्बे || नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः | नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम् || Share this - हे ईतरांनाही शेअर करा Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Related ✅ही पोस्ट ईतरांनाही पाठवा 👇 Share on WhatsApp Share on Facebook Share on Telegram धनंजय महाराज मोरे Articles: 6354 Previous Post लवथवती विक्राळा ब्रम्हांडी माळा शंकराची आरती संस्कृत आरती Next Post दत्ताची आरती - त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा. Datta Arati