हरि बोला देता हरि बो
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हरि बोला देता हरि बोला घेता । हांसतं खेळतां हरि बोल ॥१॥
हरि बोला हरि बोला खातां । सर्व कार्य करिता हरि बोला ॥२॥
हरि बोला एकांती हरि बोला लोकांतीं । देहत्यागा अंती हरि बोला ॥३॥
हरि बोला भांडतां हरि बोला कांडतां । उठता बैसतां हरि बोला ॥४॥
हरि बोला जनीं हरि बोला विजनी । एका जनार्दनी हरि बोला ॥५॥
