राग पहाड़ी
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राग पहाड़ी
सीसोद्यो रूठ्यो तो म्हांरो कांई कर लेसी ।
म्हे तो गुण गोविन्द का गास्या हो माई॥
राणोजी रूठ्यो वांरो देस रखासी,हरि रूठ्या किठे जास्या हो माई॥
लोक लाजकी काण न मानां,निरभै निसाण घुरास्या हो माई॥
राम नामकी झाझ चलास्यां,भौ-सागर तर जास्या हो माई॥
मिरा सरण सांवल गिरधर की, चरण कंवल लपटास्या हो माई॥
