राग तिलक कामोद
113.
राग तिलक कामोद
छोड़ मत जाज्यो जी महाराज॥
मै अबला बल नाय गुसाईं, तुमही मेरे सिरताज ।
मै गुणहीन गुण नांय गुसाईं, तुम समरथ महाराज॥
थांरी होयके किणरे जाऊं, तुमही हिबडारो साज ।
मिरा के प्रभु और न कोई राखो अबके लाज॥
113.
राग तिलक कामोद
छोड़ मत जाज्यो जी महाराज॥
मै अबला बल नाय गुसाईं, तुमही मेरे सिरताज ।
मै गुणहीन गुण नांय गुसाईं, तुम समरथ महाराज॥
थांरी होयके किणरे जाऊं, तुमही हिबडारो साज ।
मिरा के प्रभु और न कोई राखो अबके लाज॥