लोक-लाज तजि नाची,
23.
लोक-लाज तजि नाची,
मै तो लोक-लाज तजि नाची ।
घूंघट खोलि मंदिर मे नाची,
साँवरिया के आगे ।
लोग कहै मिरा भई बावरी,
कुल की लाज गँवाई ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
सहज मिले अविनाशी ।
23.
लोक-लाज तजि नाची,
मै तो लोक-लाज तजि नाची ।
घूंघट खोलि मंदिर मे नाची,
साँवरिया के आगे ।
लोग कहै मिरा भई बावरी,
कुल की लाज गँवाई ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
सहज मिले अविनाशी ।