ये अजब बात सुनाई भाई
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ये अजब बात सुनाई भाई ।
गरूडको पांख हिराये कागा लक्ष्मी काहे चोरन गाई ॥१॥
ये सूरज को बिंब अंधारे सोवे चंदरकु आग जलावे ।
राहुकु गिर्हो भोगी कहा रे अमृत ले मर जावे ॥२॥
कुबेर रोवे धनके आस हनुमान जोरू मंगावे ।
वैसो सबही झूठा है निंदाकी बात सुनावे ॥३॥
सुमींदर तान्हो पीरत कैसो साधू मॉंगे दान ।
बहेणि कह जन निंदक है रे वाको साच न मान ॥४॥
