लक्ष्मण धीरे चलो मै
183.
लक्ष्मण धीरे चलो मै हारी॥धृ०॥
रामलक्ष्मण दोनो भीतर । बीचमे सीता प्यारी॥१॥
चलत चलत मोहे छाली पड गये । तुम जीते मै हारी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमल बलिहारी॥३॥
183.
लक्ष्मण धीरे चलो मै हारी॥धृ०॥
रामलक्ष्मण दोनो भीतर । बीचमे सीता प्यारी॥१॥
चलत चलत मोहे छाली पड गये । तुम जीते मै हारी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमल बलिहारी॥३॥