जोगी मेरो सांवळा कां
182.
जोगी मेरो सांवळा कांही गवोरी॥धृ०॥
न जानु हार गवो न जानु पार गवो । न जानु जमुनामे डुब गवोरी॥१॥
ईत गोकुल उत मथुरानगरी । बीच जमुनामो बही गवोरी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरनकमल चित्त हार गवोरी॥३॥
182.
जोगी मेरो सांवळा कांही गवोरी॥धृ०॥
न जानु हार गवो न जानु पार गवो । न जानु जमुनामे डुब गवोरी॥१॥
ईत गोकुल उत मथुरानगरी । बीच जमुनामो बही गवोरी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरनकमल चित्त हार गवोरी॥३॥