मिरा के प्रभु गिरधर
39.
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
चरण कमल की आस ।
दरसन बिन मोहे चैन न आवै,
तुम बिन कौन सहाई ।
जनम जनम की दासी थारी,
राखो अपनी लाज ।
39.
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
चरण कमल की आस ।
दरसन बिन मोहे चैन न आवै,
तुम बिन कौन सहाई ।
जनम जनम की दासी थारी,
राखो अपनी लाज ।