कीजो प्रीत खरी,
38.
कीजो प्रीत खरी,
कीजो प्रीत खरी गिरधर गोपाल ।
झूठी प्रीत जगत की सारी,
सांची तुमरी चाल ।
तन मन धन सब अर्पण करूँ मैं,
तुम हो दीन दयाल ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
राखो अपनी लाज ।
38.
कीजो प्रीत खरी,
कीजो प्रीत खरी गिरधर गोपाल ।
झूठी प्रीत जगत की सारी,
सांची तुमरी चाल ।
तन मन धन सब अर्पण करूँ मैं,
तुम हो दीन दयाल ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
राखो अपनी लाज ।