राग खम्माच
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राग खम्माच
मिरा मगन भई हरि के गुण गाय॥
सांप पिटारा राणा भेज्या, मिरा हाथ दिया जाय ।
न्हाय धोय जब देखन लागी, सालिगराम गई पाय॥
जहरका प्याला राणा भेज्या, इम्रत दिया बनाय ।
न्हाय धोय जब पीवन लागी, हो गई अमर अंचाय॥
सूली सेज राणा ने भेजी, दीज्यो मिरा सुवाय ।
सांझ भई मिरा सोवण लागी, मानो फूल बिछाय॥
मिरा के प्रभु सदा सहाई, राखे बिघन हटाय ।
भजन भाव मे मस्त डोलती, गिरधर पर बलि जाय॥
