राग गूजरी
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राग गूजरी
कुण बांचे पाती, बिना प्रभु कुण बांचे पाती ।
कागद ले ऊधोजी आयो, कहा रह्या साथी ।
आवत जावत पांव घिस्या रे वाला अंखिया भई राती॥
कागद ले राधा वांचण बैठी, वाला भर आई छाती ।
नैण नीरज मे अम्ब बहे रे बाला गंगा बहि जाती॥
पाना ज्यू पीली पड़ी रे वाला धान नही खाती ।
हरि बिन जिवणो यू जलै रे वाला ज्यू दीपक संग बाती॥
मने भरोसो रामको रे वाला डूब तिर्यो हाथी ।
दासि मिरा लाल गिरधर, सांकडारो साथी॥
