राग पूरिया कल्यान
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राग पूरिया कल्यान
राणाजी, म्हे तो गोविन्द का गुण गास्या ।
चरणामृत को नेम हमारे, नित उठ दरसण जास्यां॥
हरि मंदर मे निरत करास्यां, घूंघरिया धमकास्या ।
राम नाम का झाझ चलास्या भवसागर तर जास्यां॥
यह संसार बाड़ का कांटा ज्या संगत नही जास्या ।
मिरा कहै प्रभु गिरधर नागर निरख परख गुण गास्यां॥
