राग वृन्दावनी
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राग वृन्दावनी
आली, म्हांने लागे वृन्दावन नीको ।
घर घर तुलसी ठाकुर पूजा दरसण गोविन्दजी को॥
निरमल नीर बहत जमुना में, भोजन दूध दही को ।
रतन सिंघासन आप बिराजैं, मुगट धर्यो तुलसी को॥
कुंजन कुंजन फिरति राधिका, सबद सुनन मुरली को ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर, बजन बिना नर फीको॥
