विटेवरी नीट उभा कटी
1706.
विटेवरी नीट उभा कटी ठेवुनी कर | तो पुंडलिकाचे द्वारी देखियेला ॥१॥
बहुली बहुली देहुडा पाउली | गुंजाहार गळा देखियेला ॥२॥
पुष्पवतीच्या संगमी गोपाळ आश्रमी | काला करिता आम्ही देखियेला ॥३॥
वेणु वाहता चहुंकरी नाद उठला अंबरी | वासुरे तटस्थ हुंबरी होऊनि देखियेला ॥४॥
अंगी चंदनाची उटी मयुरपत्रांची दाटी | चेंडू खेळता यमुनेतटी देखियेला ॥५॥
नामा म्हणे केशवा देखियेले हृदयी | जन्मवरी राही हेंचि मागे ॥६॥
