राग सावनी कल्याण
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राग सावनी कल्याण
पपइया रे, पिव की वाणि न बोल ।
सुणि पावेली बिरहुणी रे, थारी रालेली पांख मरोड़॥
चोंच कटाऊ पपइया रे, ऊपर कालोर लूण ।
पिव मेरा मै पीव की रे, तू पिव कहै स कूण॥
थारा सबद सुहावणा रे, जो पिव मेंला आज ।
चोंच मंढ़ाऊ थारी सोवनी रे, तू मेरे सिरताज॥
प्रीतम कू पतिया लिखू रे, कागा तू ले जाय ।
जाइ प्रीतम जासू यू कहै रे, थांरि बिरहस धान न खाय॥
मिरा दासी व्याकुल रे, पिव पिव करत बिहाय ।
बेगि मिलो प्रभु अंतरजामी, तुम विन रह्यौ न जाय॥
