राग हंस नारायण
112.
राग हंस नारायण
आली, सांवरे की दृष्टि मानो, प्रेम की कटारी है॥
लागत बेहाल भई, तनकी सुध बुध गई,
तन मन सब व्यापो प्रेम, मानो मतवारी है॥
सखिया मिल दोय चारी, बावरी सी भई न्यारी,
हौ तो वाको नीके जानौं, कुंजको बिहारी॥
चंदको चकोर चाहे, दीपक पतंग दाहै,
जल बिना मीन जैसे, तैसे प्रीत प्यारी है॥
बिनती करू हे स्याम, लागू मै तुम्हारे पांव,
मिरा प्रभु ऐसी जानो, दासी तुम्हारी है॥
