राग हमीर
111.
राग हमीर
हरी मेरे जीवन प्रान अधार ।
और आसरो नाही तुम बिन तीनू लोक मंझार॥
आप बिना मोहि कछु न सुहावै निरख्यौ सब संसार ।
मिरा कहै मै दासि रावरी दीज्यो मती बिसार॥
111.
राग हमीर
हरी मेरे जीवन प्रान अधार ।
और आसरो नाही तुम बिन तीनू लोक मंझार॥
आप बिना मोहि कछु न सुहावै निरख्यौ सब संसार ।
मिरा कहै मै दासि रावरी दीज्यो मती बिसार॥