मदन गोपाल नंदजीको ला
197.
मदन गोपाल नंदजीको लाल प्रभुजी॥धृ०॥
बालपनकी प्रीत बिखायो । नवनीत धरियो नंदलाल॥१॥
कुब्जा हीनकी तुम पत राखो । हम ब्रीज नारी भई बेहाल॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । हम जपे यही जपमाल॥३॥
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मदन गोपाल नंदजीको लाल प्रभुजी॥धृ०॥
बालपनकी प्रीत बिखायो । नवनीत धरियो नंदलाल॥१॥
कुब्जा हीनकी तुम पत राखो । हम ब्रीज नारी भई बेहाल॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । हम जपे यही जपमाल॥३॥