भज मन शंकर भोलानाथ भ
196.
भज मन शंकर भोलानाथ भज मन॥धृ०॥
अंग विभूत सबही शोभा । ऊपर फुलनकी बास॥१॥
एकहि लोटाभर जल चावल । चाहत ऊपर बेलकी पात॥२॥
मिरा कहे प्रभू गिरिधर नागर । पूजा करले समजे आपहि आप॥३॥
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भज मन शंकर भोलानाथ भज मन॥धृ०॥
अंग विभूत सबही शोभा । ऊपर फुलनकी बास॥१॥
एकहि लोटाभर जल चावल । चाहत ऊपर बेलकी पात॥२॥
मिरा कहे प्रभू गिरिधर नागर । पूजा करले समजे आपहि आप॥३॥