काय नही तेरी नही तेर
26.
काय नही तेरी नही तेरी ।
मतकर मेरी मेरी ॥धृ॥
ये तो दो दिनकी जिंदगानी ।
जैसा पत्थर ऊपर पानी ।
ये तो होवेगी खुरबानी ॥१॥
जैसा रंग तरंग मिलावे ।
ये तो पलक पिछे उडजावे ।
अंते कोई काम नही आवे ॥२॥
सून बात कहू परमानी ।
व्हांकी क्या करता गुमानी ।
तुम तो खडे है बैमानी ॥३॥
अब मत गाफळ रहेना फंदा ॥४॥
कहत कबीरा सुन नर ज्ञानी ।
ये शीख हृदयमे मनी ।
तेरेकु बात कही समजानी ॥५॥
॥पुंडलिक वरदे हरि विठ्ठल ॥
