मै गुलाम मै गुलाम मै
25.
मै गुलाम मै गुलाम मै गुलाम तेरा । तूचि मेरा सच्चा सांई नाम लेऊ तेरा ॥धृ॥
रूप नही रंग नही नही बरन छाया ॥निर्विकार निर्गुनही तूंचि रघुराया ॥१॥
एक रोटी दे लंगोटी द्वार तेरा पावू । काम क्रोध छोडकर हरी गुण गाउ ॥२॥
मेहरबान मेहरबान मेहेर करो मेरी । दास कबीर चरण खडा नजर देख तेरी ॥३॥
