राग दरबारी-ताल तिताल
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राग दरबारी-ताल तिताला
तुम सुणौ दयाल म्हारी अरजी॥
भवसागर मे बही जात हौं, काढ़ो तो थारी मरजी ।
इण संसार सगो नहि कोई, सांचा सगा रघुबरजी॥
मात पिता औ कुटुम कबीलो सब मतलब के गरजी ।
मिरा की प्रभु अरजी सुण लो चरण लगाओ थारी मरजी॥
