वारकरी रोजनिशी

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वारकरी रोजनिशी › 5. संत एकनाथ महाराज › 1. संत एकनाथ अभंग गाथा › 1. संत एकनाथ अभंग गाथा › 270. बाजेगारी ३९७१ ते ३९७२

सरगमें बाजी पातालमें

🙏 5. संत एकनाथ महाराज · ABH-090363 · अभंग क्र. ३९७२

3972.
सरगमें बाजी पातालमें बाजी । जीतदेखो उत बाजी । धीमधीम चलता थयथय नाचत । ये दील बांदरा रज्या तल बुबके चने । बार बारउठलेटलेट । कहु तो चुपीच लेट । तै मेरा नाम क्यापुछेगा भाई । नाम कहु तो अजप । अवल मुझे नामन था । दरम्यान सो पैदा हुवा । आलेखनकु बालपलटाया । सलेखनकुमार चलाया । तुटा फाटान्हाये । उस शेहेरमें है पैटा । व्हावी बडे बडे महाजन बेटेहै । कछु देवे कछु दिलावे । आजका दिन देनेकाआजका दिन लेनेका । दील जाने सो देख । सरजाबती सो देख । मुसो नाम बोल । दृष्टीकी गांठखोल । तुं ग्यानी तुं ग्यानी । उपर दुगानी तीनदमडीया । तीन कवडीया । कीस लंडीने क्या देना । कीस लंडीने लेना । मेरा साहेब तो ऐसा है । दीलदरीयाव । महजुत भरियाव । उभे तो मेरी मागनेकीबाट । काट काट कर छाडी है । हारा देना जीतालेना । जो आंदर सोहंसारा । जो बाहेर सोहंसारा । फिर तेरे तै चोंदी कैसी देऊंगा । चोंदी कहे तोबडेबडेकु दीयी है । भले भलेकु दीयी है । तेरेपाराशरकुभी चोंदी दियी है । जो दुरगंधासो ख्यालकिया है । बेद व्यास पैदा हुवा हैं । तेरे नारदकुबीचोंदी दियी है । पलखम्याने नारदकी नारदी कियाहै । घुसल करते पेट बढाया है । हुकूम करते साठपोंगडे जनया है । तेरे ब्रह्मेकु चोंदी दियी है । जोसरस्वतीसें हैयाल हुवा है । तो ब्रह्मा बेटी चोंदकहला है । तेरे विष्णुकु चोंदी दीयी है । जो वृंदाकेस्मशनामें रह्या है । तेरे महादेवकुबी चोंदी दीयी है । जो जंगलमें मोहनीके सात हैया हुवा है । तेरे बडेदेवकुबी चोंदी दियी है । जो आदि औरत आधा मर्दकिया है । रहे रहे रहे मुर्गी के । आपने जगाच रहे । ज्यगाछोडकर जायगा तो । मारतेमारतेमारखायेगा । उपर जबरोयल काटेंगा । दांत निकसकर पसरेंगाटांगा । फिर क्या माके पेठ आवेगा । इस बद्दलमगरुरपना दुर कर । महजुदसो याद धर । धरेगा तोकैसी धर धरेगा तो जदान कर । परका खबतरकीया । टालीका साप बनाया । उडा ना उड जावे । सत्यलोककुबी नजावे । सनकादिककी काढी माया । कहे एका जनार्दन भिस्त दोज्यक सही बाजेगिरीअल्ला ही अल्ला ॥१॥

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