बाजेगारी ३९७१ ते ३९७
3971.
बाजेगारी ३९७१ ते ३९७२
संसार बाजेगिरी देखादुरलख आदेशाआकर देख । जो कुच होनारा सो कदा न चुके । वल्ले वस्तादकी पदनामी । आखर जमानी । यादीनिकसो बुरे हाल होवेगे । दुनयामें बडा बड़ा तमाशा । बडे बडे हुन्नेर लगे । विद्या अविद्या बोलना एक । वल्ले वर्तणुक अनेक । इस काममें बडे बाजी । जीसअंत न पाया ॥१॥ अरे देख देख देख देख । पीरपैंगबर अवलिया । सय्यद सादात विषयाकु झटे । वासना उटे ना हाटे । अरे देख देख । दौड दौडदौड । जब लगउजाडातबलगदौडा अंधेरापडेगापिछेकछुरनचले । आपसुआप बाजींदे बुरेसटदेनाधंदे । हरिदासके प्यारे । रघुनाथके बंदे । कह्या नभावे फाड फाड फाड खावें । बांदरामे रान हुवे ॥२॥ तमाशा देख तोअलमसुख होवे । दील बांदरारज्या पाले तो मुखचना बाहेर मैले । उठे उठे उठे । बैठे बैठे बैठे । लेटे लेटे लेटे । कहु तो चुपकाची लेटेदील बांदरा रज्या तलब बाजेगारी येही खेले । तोमेरे नामकी पुछेगी बाता । तो मेरे नाम क्या है । अजबता । अवलमुझे नामचि न था । दरम्यान पैदाहुवा । सलखन सुखाद बैठा । वांहा मुथी उठा नाठा॥३॥ उसथे बैठा निरखनकामार चलाया । सलेखनउस देखतीसलेखन बडे महाजना राजद्वारी कहनेंलगे । सलेखन का तमाशा देख । वसले मुजेलेनीलखन का तमाशा देख । ज्या हा हा हा हा । आबाबा बाबा । आललललाआत ततत वोही हैवोही है । जोर है जोर है । लढेगा लढेगा लढेगा । तोपडेगा । पडेगा तो चडेगा । हुशार भाई हुशार । भीतर तोहुशार तो सुखी । बोहरी ती हुशारी तो बहुहुशारी ॥४॥गुरु बडा क्या चेला बडा । बाप बडाक्या बेटा बडा । बुढ्ढा बडा क्या जवान बडा । तोजवान बडा । कुत्ती ककवा चिटी चिडी । उदभौकुभौमाने । गुरु बडा वा चेला बंडा । तो चेला पनामेंपडा । गुरुके बडाईसेंचेला बडा । बाप बडा वा बेटाबडा । तो बापका नाम बेटा धरे । बेटेकी चाकरीबाप करे । बापके शीरपर बेटा चढे । उस बद्दल बेटाबडेपना घडे । जवान बडा वा बुढ्ढा बड़ा । बुढ्ढाजाग मर जाये । जवान बहत तवाना होये । बद्रापडे जवान चढे । इस बद्दल जवान बडे पनामें पडे ॥५॥ नजर कर नजर कर नजर कर । यारी होनजर कर । नजर करेगा सो जीतेगा । ननजर करेगासो हरेगा । हारिया देना जीता लेना । हुशार भाईहुशार । हुशार होकार समाल । मैं कैसी चोंदी ल्याएँगामैनें भले भलेकु चोंदी दिया । मैने बडे बडे बडेकुथोंदी दिया । मैने बडे बडेकु बेडाल लाया ॥६॥देख देख देख तमाशा मेरा । मैनें बिभांडीकुं चोंदीदिया । वो मुर्गीके चोदने लाया । ऋषीश्रृंगकु चोंदीदिया । दो नाचनीका दुमाला लाया । वो पाराशरकुंगांदी दिया । वो दुर्गंधीका ख्याल लाया । एक घडीमें तप गमाया । दुर्गांधासो सुगंधा किया । उसकेजगामे व्यास निफजाया । वो महादेवकुंबी चोदिदिया । वो मोहनी का दुमाला लाया । ब्रह्माकु चोदीदिया । वो आपने बेटी का ख्याल लाया । मना कर्तायाद न पाया । वो सरस्वतीसे हायीयाल हुवा । तुमारेविष्णुकुबी चोंदी दिया । वो वृंदाके स्मशानमे लढाया । आयारेनारद । उसनारदकुबीचोंदी दिया । आंगुलकरतेपेट बढाया । साठ बेटे का हुकुमजनाया । वोतुम्हारा अस्सल देव । जिसे नामरुप नहीं । उसबडे देवकुबी बतलाया । वो चोंदीमें जगत्र भुलाया ॥७॥ रहे रहे रहे । चीपरीके रहे ज्या । आपने जगोमेरहे ज्या । जगा छोडकर जायगा तो जान जायेगा । तो येता मार मारू । मारत मारते मारलेंड पडेगा । डांगा उपर पिछ कुटेंगा । दांत निकसकर पसरेगा । डांगा तुमारे पेटमेकु जावेगा । इसबद्दल गुमरपनादुरकर मैजदकुयादधर । विषयाकुमुसादलमबीसर । देख देख देख लढुनको लळु नको । चोंदीके जगालढुं नको । वाहाली आपडू नको । उस जगा लेंडपडेगा तो कालका फांसा पडेगा । ओ तुझे कैंवचुपछोडेगा । इसबद्दल बिसयाकुलढुनको ८॥हमारादाता कुच देता नही । इसबद्दल बिसयाकु लढत है । व्हां बड़े बड़े जन राजद्वार बैठे है । कुच देना सोआज देने का दिन है । दिल चहासो देव । कुच तबीनाम बोले । दील की गांठ खोले । आख बतक कामआवेगा । उस खैरात पर हात चले । चुप बैठ । मुंढीहालावे । कुच काम नही । जासो दिल देवेगे । तोनिज मौजक पावेगे॥९॥सुख शांती सुख छायेगा । भीस्तीकेती मेवे खावेगा । बड्या बड्यासी बोलेबढाई । ऐसा कुच देवो ना । चिप बैठ मुंढी हालावे । कुच काम नही । ऐसा कुच देवो ना जो खाते पीते । भरे । भरियासो कबहु ना सरे । पोंगडया टिंगड्याकुंखाना पुरे । सबलिया जमकु बस कर । ऐसा कुचदेवो ना । एक्या देवेगे बिचारे । यितला दिया भीकमागनेकु गया । उसती दौलत कही हाकाले लंडीनेलिया । ईगानी पर दुगानी । दुगानी पर तिगानी । जिसके तिसके घर दुगानी । परतीरुका । ए क्यादेवेगे बिचारे । तो मेरा दाता कैसा है । हा सोरातसादेखना । तो हमारा कुच नहीं । भोजराजा देशकानहीं । इंद्र देशका नही । बुरेर देशका । इतना देवेतो पेट भरा भर लेवे । ए क्या देवेगे बिचारे ॥१०॥ तो मेरा दाता कैसा है । उनके शतकथमे । मेरा जितमेरब चलता । उन्हे थीमें राजना बाक । उसकीखेळता । उनकी मेरा जीवता । उनकुं मगनावयाबाता । काठसक्या । नजर कर नजर कर । यारोहों नजर करों । नजर करेगा सो जितेगा । ननजर करेगा तो हारेगा । हारिया देना जीता लेना । अद्दल एक । एक के दो । दोकेतीन । तीन के पांच । पांचके पचीस । गाफल कहतें दस बारा पंधरा बीस । वल्ले सही । जान पाचके पचीस । डालीका सापकिया । भलेभलेकु बडे बडेकु । उन्ने लायी माया । बीन लढेगा उन्नेजगत्र भुलाया ॥११॥गाफल कहतेमेरी माया । गुरुबोध ऐसा पाया । ऐसी हमारी शांतीगाये । वो क्रोध बागकु खाये । अहंकार साप लढेनाचढे । मुबा जैसा चीपका चीपपडे । पर परका खबुतर । खबुतरकाबी घर । ये बाता सबकी दुर कर । पंखविना हौस किया । उडे चढे बिन सत्यलोककुगया । सनकादिककी काढी माया । मुख्य मुळ ब्रह्महुशार किया । उन्ने हौसनें बडा तमाशा किया । ब्रह्मासनती मुंड मुंडाया आपबी व्हा छपी खाया । हुषार देखे तो नजीक छुपाया एक एकमो अनेक । अनेक मो एक । येही देखना मे हुशारी में देख । वांहा नही देखना दु:ख येही खेळे खेळे तेसमाधिसुख । एका जनार्दनी जग समस्त । इसकेबाजीमे भिस्त दस्त । देखो फरिस्तो अजब बात । पैंगबर कहे सदर आमत । येही तमाशा सिध्द देखे । जो देखे सो जुदा नहीं देख । एका जनार्दनी । बैसकबाजे गारी । ऐन लहक ॥१२॥
