अब मै सरण तिहारी जी,
18.
अब मै सरण तिहारी जी, मोहि राखौ कृपा निधान ।
अजामील अपराधी तारे, तारे नीच सदान ।
जल डूबत गजराज उबारे, गणिका चढ़ी बिमान ।
और अधम तारे बहुतेरे, भाखत संत सुजान ।
कुबजा नीच भीलणी तारी, जाणे सकल जहान ।
कह लग कहूँ गिणत नहि आवै, थकि रहे बेद पुरान ।
मिरा दासी शरण तिहारी, सुनिये दोनो कान ।
