कोई कहियौ रे प्रभु आ
19.
कोई कहियौ रे प्रभु आवन की,
आवनकी मनभावन की ।
आप न आवै लिख नहि भेजै,
बाण पड़ी ललचावन की ।
ए दोउ नैण कह्यो नहि मानै,
नदिया बहै जैसे सावन की ।
कहा करू कछु नहि बस मेरो,
पांख नही उड़ जावनकी ।
मिरा कहै प्रभु कब रे मिलोगे,
चेरी भै हूँ तेरे दांवन की ।
