हे री मै तो प्रेम-दि
17.
हे री मै तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय ।
घायल की गति घायल जाणै, जो कोई घायल होय ।
जौहरि की गति जौहरी जाणै, की जिन जौहर होय ।
सूली ऊपर सेज हमारी, सोवण किस बिध होय ।
गगन मंडल पर सेज पिया की किस बिध मिलणा होय ।
दरद की मारी बन-बन डोलूँ बैद मिल्या नहि कोय ।
मिरा की प्रभु पीर मिटेगी, जद बैद सांवरिया होय ।
