कोई बोले निरवा कोई ब
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कोई बोले निरवा कोई बोले दूर । जलकी मछरी चले खजूर ॥१॥
काहेरे बकवा दलायो । जिन हर पायो तिने छपायो ॥२॥
पंडत होके बेद बखाने । मूरख नामदेव रामरामही जाने ॥३॥
कानको कुलंक रह्यो रामनाम लेत ही । भयो पतत पवित्न भये । राम कहीतही ॥४॥
राम संग नामदेव जिनको प्रत्यय आयी । एकादशीव्रत रहे काहेको तिरथ जाई ॥५॥
भणत नामदेव सुकृत सुमत भये । गुरुमत राम कहोबेन कोन बैकुंठ गये ॥६॥
