मारबार जैसे नीर वाल्
९०.
मारबार जैसे नीर वाल्हा । बेल वाल्हा कर हला । ज्यो कुरंगनसे नाद वाल्हा । मेरे मन रामैया ॥१॥
मेरा मन रूढो अन्योतरंग रुढो मेरो रामैया ॥ध्रु०॥
ज्यो धरणीको इंद्र वाल्हा । कूसम बास जैसे भवरला । जू कोकल को अंब वाल्हा । तो मेरे मन रामैया ॥२॥
चतवीको जैसे सूर्र बाल्हा । मानस सरोवर हंसला । जू तरणीको कंत वाल्हा । त्यू मेरे मन रामैय्या ॥३॥
बालकको जैसे खिर वाल्हा । चातक मूख जैसे जलधरा । मछरीको जैसे नीर वाल्हा । त्य़ू मेरे मन रामैया ॥४॥
साधक सिद्ध सकल मुनी चाहे । विरले काहू दीठला । सकल भवन तेरो नाम वाल्हा । त्य़ू नामे मन विठला ॥५॥
