जल कैशी भरु जमुना भय
195.
जल कैशी भरु जमुना भयेरी॥धृ०॥
खडी भरु तो कृष्ण दिखत है । बैठ भरु तो भीजे चुनडी॥१॥
मोर मुगुटअ पीतांबर शोभे । छुम छुम बाजत मुरली॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चणरकमलकी मै जेरी॥३॥
195.
जल कैशी भरु जमुना भयेरी॥धृ०॥
खडी भरु तो कृष्ण दिखत है । बैठ भरु तो भीजे चुनडी॥१॥
मोर मुगुटअ पीतांबर शोभे । छुम छुम बाजत मुरली॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चणरकमलकी मै जेरी॥३॥