फूल मंगाऊ हार बनाऊ ।
175.
फूल मंगाऊ हार बनाऊ । मालीन बनकर जाऊं॥१॥
कै गुन ले समजाऊ । राजधन कै गुन ले समाजाऊं॥२॥
गला सैली हात सुमरनी । जपत जपत घर जाऊं॥३॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । बैठत हरिगुन गाऊं॥४॥
175.
फूल मंगाऊ हार बनाऊ । मालीन बनकर जाऊं॥१॥
कै गुन ले समजाऊ । राजधन कै गुन ले समाजाऊं॥२॥
गला सैली हात सुमरनी । जपत जपत घर जाऊं॥३॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । बैठत हरिगुन गाऊं॥४॥