जाके मथुरा कान्हांने
176.
जाके मथुरा कान्हांने घागर फोरी । घागरिया फोरी दुलरी मोरी तोरी॥धृ०॥
ऐसी रीत तुज कौन सिकावे । किलन करत बलजोरी॥१॥
सास हठेली नंद चुगेली । दीर देवत मुजे गारी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरनकमल चितहारी॥३॥
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जाके मथुरा कान्हांने घागर फोरी । घागरिया फोरी दुलरी मोरी तोरी॥धृ०॥
ऐसी रीत तुज कौन सिकावे । किलन करत बलजोरी॥१॥
सास हठेली नंद चुगेली । दीर देवत मुजे गारी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरनकमल चितहारी॥३॥