डर गयोरी मन मोहनपास
174.
डर गयोरी मन मोहनपास । डर गयोरी मन मोहनपास॥१॥
बीरहा दुबारा मै तो बन बन दौरी । प्राण त्यजुगी करवत लेवगी काशी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । हरिचरणकी दासी॥३॥
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डर गयोरी मन मोहनपास । डर गयोरी मन मोहनपास॥१॥
बीरहा दुबारा मै तो बन बन दौरी । प्राण त्यजुगी करवत लेवगी काशी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । हरिचरणकी दासी॥३॥