सुभ है आज घरी ।
48.
सुभ है आज घरी ।
सुभ है आज घरी, मेरे घर आए गिरधारी ।
मंगल गाओ सखियन मिलकर,
आनंद भयो भारी ।
नैनन भरि भरि दरसन देखूँ,
मोहन मूरत प्यारी ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
जनम सफल करि डारी ।
48.
सुभ है आज घरी ।
सुभ है आज घरी, मेरे घर आए गिरधारी ।
मंगल गाओ सखियन मिलकर,
आनंद भयो भारी ।
नैनन भरि भरि दरसन देखूँ,
मोहन मूरत प्यारी ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
जनम सफल करि डारी ।