वारकरी रोजनिशी

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आओ मनमोहना जी जोऊ था

🙏 29. संत मिराबाई · ABH-076832 · अभंग क्र. १०

10.
आओ मनमोहना जी जोऊ थांरी बाट ।
खान पान मोहि नैक न भावै नैणन लगे कपाट॥
तुम आया बिन सुख नहि मेरे दिल मे बहोत उचाट ।
मिरा कहै मै बई रावरी, छांड़ो नाहि निराट॥
आओ सहेल्हा रली करा है पर घर गवण निवारि॥
झूठा माणिक मोतिया री झूठी जगमग जोति ।
झूठा आभूषण री, सांची पियाजी री प्रीति॥
झूठा पाट पटंबरा रे, झूठा दिखडणी चीर ।
सांची पियाजी री गूदड़ी, जामे निरमल रहे सरीर॥
छपन भोग बुहाय देहे इण भोगन मे दाग ।
लूण अलूणो ही भलो है अपणे पियाजीरो साग॥
देखि बिराणे निवांणकू है क्यू उपजावे खीज ।
कालर अपणो ही भलो है, जामे निपजै चीज॥
छैल बिराणो लाखको है अपणे काज न होय ।
ताके संग सीधारता है भला न कहसी कोय॥
बर हीणो अपणो भलो है कोढी कुष्टी कोय ।
जाके संग सीधारता है भला कहै सब लोय॥
अबिनासीसू बालबा हे जिनसू सांची प्रीत ।
मिरा कू प्रभुजी मिल्या है ए ही भगतिकी रीत॥

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