कुंजबनमो गोपाल राधे॥
47.
कुंजबनमो गोपाल राधे॥धृ०॥
मोर मुकुट पीतांबर शोभे । नीरखत शाम तमाल॥१॥
ग्वालबाल रुचित चारु मंडला । वाजत बनसी रसाळ॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरनपर मन चिरकाल॥३॥
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कुंजबनमो गोपाल राधे॥धृ०॥
मोर मुकुट पीतांबर शोभे । नीरखत शाम तमाल॥१॥
ग्वालबाल रुचित चारु मंडला । वाजत बनसी रसाळ॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरनपर मन चिरकाल॥३॥