कीसनजी नही कंसन घर ज
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कीसनजी नही कंसन घर जावो । राणाजी मारो नही॥धृ०॥
तुम नारी अहल्या तारी । कुंटण कीर उद्धारो॥१॥
कुबेरके द्वार बालद लायो । नरसिंगको काज सुदारो॥२॥
तुम आये पति मारो दहीको । तिनोपार तनमन वारो॥३॥
जब मिरा शरण गिरधरकी । जीवन प्राण हमारो॥४॥
