मेरी गेंद चुराई । ग्
103.
मेरी गेंद चुराई । ग्वालनारे॥धृ०॥
आबहि आणपेरे तोरे आंगणा । आंगया बीच छुपाई॥१॥
ग्वाल बाल सब मिलकर जाये । जगरथ झोंका आई॥२॥
साच कन्हैया झूठ मत बोले । घट रही चतुराई॥३॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमल बलजाई॥४॥
103.
मेरी गेंद चुराई । ग्वालनारे॥धृ०॥
आबहि आणपेरे तोरे आंगणा । आंगया बीच छुपाई॥१॥
ग्वाल बाल सब मिलकर जाये । जगरथ झोंका आई॥२॥
साच कन्हैया झूठ मत बोले । घट रही चतुराई॥३॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमल बलजाई॥४॥