तेरे सावरे मुख पर वा
102.
तेरे सावरे मुख पर वारी । वारी वारी बलिहारी॥धृ०॥
मोर मुगुट पितांबर शोभे । कुंडलकी छबि न्यारी न्यारी॥१॥
ब्रिंदामन मो धेनु चरावे । मुरली बजावत प्यारी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरण कमल चित्त वारी॥३॥
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तेरे सावरे मुख पर वारी । वारी वारी बलिहारी॥धृ०॥
मोर मुगुट पितांबर शोभे । कुंडलकी छबि न्यारी न्यारी॥१॥
ब्रिंदामन मो धेनु चरावे । मुरली बजावत प्यारी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरण कमल चित्त वारी॥३॥