माई मेरो मोहनमे मन ह
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माई मेरो मोहनमे मन हारूं॥धृ०॥
कांह करु कीत जाऊ सजनी । प्रान पुरससु बरयो॥१॥
हू जल भरने जातथी सजनी । कलस माथे धरयो॥२॥
सावरीसी कीसोर मूरत । मुरलीमे कछु टोनो करयो॥३॥
लोकलाज बिसार डारी । तबही कारज सरयो॥४॥
दास मिरा लाल गिरिधर । छान ये बर बरयो॥५॥
