तुम लाल नंद सदाके कप
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तुम लाल नंद सदाके कपटी॥धृ०॥
सबकी नैया पार उतर गयी । हमारी नैया भवर बिच अटकी॥१॥
नैया भीतर करत मस्करी । दे सय्या अरदन पर पटकी॥२॥
ब्रिंदाबनके कुंजगलनमो सीरकी । घगरीया जतनसे पटकी॥३॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । राधे तू या बन बन भटकी॥४॥
