वारकरी रोजनिशी

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गोबिन्द कबहु मिलै पि

🙏 29. संत मिराबाई · ABH-076632 · अभंग क्र. ७१

71.
गोबिन्द कबहु मिलै पिया मेरा॥
चरण कंवल को हंस हंस देखूं, राखू नैणा नेरा ।
निरखणकू मोहि चाव घणेरो, कब देखू मुख तेरा॥
व्याकुल प्राण धरत नहि धीरज, मिल तू मीत सबेरा ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर ताप तपन बहुतेरा॥

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