मोहन डार दीनो गले फा
185.
मोहन डार दीनो गले फांसी॥धृ०॥
ऐसा जो होता मेरे नयनमे । करवत ले जाऊ कासी॥१॥
आंबाके बनमे कोयल बोले बचन उदासी॥२॥
मिरा दासी प्रभु छबी नीरखत । तू मेरा ठाकोर मै हू तोरी दासी॥३॥
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मोहन डार दीनो गले फांसी॥धृ०॥
ऐसा जो होता मेरे नयनमे । करवत ले जाऊ कासी॥१॥
आंबाके बनमे कोयल बोले बचन उदासी॥२॥
मिरा दासी प्रभु छबी नीरखत । तू मेरा ठाकोर मै हू तोरी दासी॥३॥