देवकी कहे सुन बात भ्
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देवकी कहे सुन बात भ्रतारो सुनिके आवे कंस रे ।
जानि मनमें लेकर होतो श्रीधर नइ जसवदा पास रे ॥१॥
झबके जावोजी तुम वसुदेवा आयेंगे कंसबिखार ।
डंखविखे प्राण लेवे सबके, कहा करो बिचार ॥२॥
आधी रात भरी हे जमुना आये मेघ तुसार ।
पाव मे बेरी कुलुपो कुलुपो कैसे जाना नंद के बार ॥३॥
बली बली बारो राखते हैं अब कहा करे अविनाश रे ।
देखे कंस तो मोरसिस प्राणकु अविनाश रे ॥४॥
अपने कर हरि लेकर देवकी देत भ्रतारो हात रे ।
बेरी तबही तूटि परी है बंधन तूटो रात रे ॥५॥
बहेणि कहे जिसे कृष्णकृपा उसे कहा करे जमपास रे ।
बेरी कुलुपो आपही खोलत जावत है अविनाश रे ॥६॥
