वारकरी रोजनिशी

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ये गोकुल चल हो कहत म

🙏 28. संत बहिणाबाई · ABH-076086 · अभंग क्र. ३६६

366.
ये गोकुल चल हो कहत मुर्‍हारी ।
मेघतुसार निबारे फनिधर सेवा करे बलहारी ॥१॥
बसुवा अपने कर दोन्हो पालख योंही कीन्हों ।
जमुना के तट आयके देखे पूरन नीर जानो ॥२॥
पूरन रूप यो देखे जमुना जानिके सबही भाव ।
दोही ठोर भई जमुना-नीर तब जानत यो हरिभाव ॥३॥
जैसो परवत बैसो नीर हवो जानिके आस ।
पाव लगे जमु कहे माकु जायगे सब दोस ॥४॥
जिस चरन को तीरथ शंकर माथा रखिया नीर ।
वो अब चरना प्राप्त भये होवे जान उधार ॥५॥
बहेणि कहे जिसकू हरि भावे ताकू कालही धाके ।
बसुदेवाकर आपही मुरारि काहेकु संकट वाके ॥६॥

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