मै भुली घरजानी बाट ।
182.
मै भुली घरजानी बाट । गोरस बेचन आये हाट ॥१॥
कान्हा रे मनमोहन लाल । सब ही बिसरू देखे गोपाल ॥धृ॥
कहा पग डारू देख आनेरा । देखे तो सब वोहिने घेरा ॥२॥
हु तो थकित भई रे तुका । भागा रे सब मनका धोका ॥३॥
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मै भुली घरजानी बाट । गोरस बेचन आये हाट ॥१॥
कान्हा रे मनमोहन लाल । सब ही बिसरू देखे गोपाल ॥धृ॥
कहा पग डारू देख आनेरा । देखे तो सब वोहिने घेरा ॥२॥
हु तो थकित भई रे तुका । भागा रे सब मनका धोका ॥३॥