संत मिराबाई पदावली :
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संत मिराबाई पदावली :- भाग २
कृष्णमंदिरमो नाचे तो ताल मृदंग रंग चटकी ।
पावमो घुंगरू झुमझुम वाजे । तो ताल राखो घुंगटकी॥१॥
नाथ तुम जान है सब घटका मिरा भक्ति करे पर घटकी॥धृ०॥
ध्यान धरे मिरा फेर सरनकु सेवा करे झटपटको ।
सालीग्रामकू तीलक बनायो भाल तिलक बीज टबकी॥२॥
बीख कटोरा राजाजीने भेजो तो संटसंग मिरा हटकी ।
ले चरणामृत पी गई मिरा जैसी शीशी अमृतकी॥३॥
घरमेंसे एक दारा चली शीरपर घागर और मटकी ।
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । जैसी डेरी तटवरकी॥४॥
