कैसी जादू डारी । अब
52.
कैसी जादू डारी । अब तूने कैशी जादु॥धृ०॥
मोर मुगुट पितांबर शोभे । कुंडलकी छबि न्यारी॥१॥
वृंदाबन कुंजगलीनमो । लुटी गवालन सारी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमल बलहारी॥३॥
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कैसी जादू डारी । अब तूने कैशी जादु॥धृ०॥
मोर मुगुट पितांबर शोभे । कुंडलकी छबि न्यारी॥१॥
वृंदाबन कुंजगलीनमो । लुटी गवालन सारी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमल बलहारी॥३॥